बचपन से सनातनी संस्कारों का बीजारोपण l हनुमान भजनों पर झूमे हनु और मनु के नन्हे कदम l
रिपोर्टर राजू ठाकुर l
देहरादून
बचपन से ही बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कार देना उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी भावना को साकार करते हुए बड़ोंवाला निवासी राजेश शर्मा अपने दोनों नातीयों हनु और मनु को सनातनी संस्कारों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हनुमान जी के वीर रस से परिपूर्ण भजन वीर हनुमाना पर दोनों नन्हे बच्चों के झूमते कदम
भक्ति और संस्कारों का सुंदर संदेश दे रहे है।
हनुमान जी के भजन पर नन्हे बच्चों के झूमते कदम यह संदेश देते कि यदि बचपन से ही बच्चों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराया जाए, तो उनके मन में श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों के प्रति स्वाभाविक लगाव विकसित हो सकता है।
राजेश शर्मा का यह प्रयास समाज के लिए भी प्रेरणादायक है। आज के बदलते दौर में बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सनातन परंपराओं की जानकारी देना भी आवश्यक है। परिवार बच्चों की पहली पाठशाला होता है, जहां से उन्हें बड़ों का सम्मान, सेवा, अनुशासन और सदाचार जैसे संस्कार मिलते हैं।
यदि घरों के साथ-साथ विद्यालयों में भी भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा और महापुरुषों के आदर्शों से बच्चों को परिचित कराने पर ध्यान दिया जाए, तो नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकेगी। बच्चों में बचपन से ही अच्छे संस्कार विकसित करना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।